राजनीति में कभी- कभी किसी फैसले के लिए दल प्रमुख को न केवल आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है, बल्कि समर्थकों के कोप का भी भाजन बनना पड़ता है. ऐसे ही दौर से पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भी गुजरना पड़ा, जब उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व नेता नरेश अग्रवाल को भाजपा में प्रवेश देने का फैसला किया.यूपी के राज्य सभा चुनाव के लिए राजनीति की बिसात पर अमित शाह की इस शह ने आखिर बसपा को मात दे ही दी.
उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व नेता नरेश अग्रवाल को भाजपा में प्रवेश देने के बाद नरेश अग्रवाल द्वारा जया बच्चन को लेकर दिए गए बयान के बाद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व निशाने पर आ गया था. तब ऐसा लग रहा था, कि पार्टी ने गलत फैसला ले लिया, लेकिन राज्यसभा चुनाव में अमित शाह का यह फैसला मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ. उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों में से नौ पर भाजपा और एक पर सपा उम्मीदवार की जीत हुई.
बता दें कि सबसे ज्यादा रोचक मुकाबला दसवीं सीट के लिए हुआ.इस सीट के लिए एक-एक विधायक का वोट कीमती हो गया.क्रॉस वोटिंग का खेल भी हुआ, लेकिन दूसरी वरीयता के वोटों से भाजपा के अनिल अग्रवाल ने यह बाज़ी जीत ली.नरेश अग्रवाल के बेटेऔर सपा विधायक नितिन अग्रवाल ने भाजपा के पक्ष में वोट किया. इससे भाजपा को एक वोट का लाभ मिला.बसपा के ही विधायक अनिल कुमार सिंह ने भी भाजपा के पक्ष में वोट किया. इससे भाजपा की जीत पक्की हो गई .गठबंधन के भरोसे खड़े हुए बसपा के एकमात्र प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर प्रथम वरीयता के 33 वोट हासिल करने के बाद भी हार गए और बसपा का हाथी राज्य सभा जाने से पहले ही रास्ते में अटक गया.यह सब अमित शाह की चाणक्य नीति से सम्भव हो सका. गुजरात के राज्य सभा चुनाव में अहमद पटेल से मिली हार से सबक लेते हुए इस बार भाजपा ने जबरदस्त तैयारी की.
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