नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी अदालत आज चुनाव के नामांकन पर उम्मीदवार की आमदनी के खुलासे करने या न करने के बारे में फैसला करेगी. लोक प्रहरी एनजीओ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को फैसला सुना सकती है. एक गैर सरकारी संगठन लोक प्रहरी ने याचिका में कहा है कि चुनाव में सुधारों के लिए सुप्रीम कोर्ट सरकार और चुनाव आयोग को आदेश दे कि नामांकन के वक्त प्रत्याशी अपनी और अपने परिवार की आय का ब्यौरा भी दे. मामले में अब तक -
सुप्रीम कोर्ट ने सांसद और विधायकों की संपत्ति में 500 गुना बढ़ोतरी को लेकर सुनवाई करते हुए सवाल पूछा था कि अगर सांसद और विधायक ये बता भी दें कि उनकी आय और सम्पदा में इतनी तेजी से बढ़ोतरी किसी बिजनेस से हुई तो भी ये सवाल उठता है कि सांसद और विधायक होते हुए आप कोई भी बिजनेस कैसे कर सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि 1995 में एन एन वोहरा कमेटी की रिपोर्ट आई थी. सरकार ने उस पर अमल के लिए क्या काम किये? हालत आज भी जस की तस ही है. कोर्ट ने सरकार को फटकारते हुए कहा था कि आपने रिपार्ट को लेकर कुछ नहीं किया.
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उस सील बंद लिफाफे को भी खोला जिसमें सात लोकसभा सांसदों और 98 विधायकों द्वारा चुनावी हलफनामे में संपत्तियों के बारे में दी गई जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न में दी गई जानकारी से अलग पाई गई. बहरहाल आज की सुनवाई के बाद मामले पर कोर्ट के फैसले आने का सभी को इंतज़ार है .
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