मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने प्रचार में "बटेंगे तो कटेंगे" का नारा अपनाया है, लेकिन भाजपा के गठबंधन सहयोगी और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने इस नारे का कड़ा विरोध किया है। अजित पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में हिंदू एकता के नाम पर इस तरह के नारे नहीं चलेंगे और यह नारा राज्य की राजनीति में असरदार नहीं है। उन्होंने कहा कि भले ही यह नारा उत्तर प्रदेश या दूसरे राज्यों में सफल हो, महाराष्ट्र की संस्कृति और राजनीति अलग है। पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में विकास सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है और राजनीति में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना जरूरी है।
अजित पवार ने बताया कि महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज, शाहू महाराज और महात्मा फुले जैसे नेताओं का राज्य है, जहाँ धार्मिक सौहार्द हमेशा से प्राथमिकता में रहा है। यह नारा पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के आधार पर लिया गया था, जो बांग्लादेश में हुई हिंदू विरोधी हिंसा के संदर्भ में था। महाराष्ट्र के चुनावी अभियान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे दोहराया, और प्रधानमंत्री मोदी तथा भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने भी अपने रैलियों में इसे शामिल किया।
चुनाव में अजित पवार की पार्टी एनसीपी ने नवाब मलिक, हसन मुश्रीफ, सन्ना मलिक, और जीशान मलिक जैसे मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है। मुस्लिम वोट महाराष्ट्र में एनसीपी के लिए अहम हैं, और यह नारा अल्पसंख्यक वोटर्स को दूर कर सकता है। इससे पहले, नवाब मलिक की उम्मीदवारी पर भाजपा ने टिप्पणी की थी।
महाराष्ट्र में 20 नवंबर को एक ही चरण में चुनाव होंगे। इसमें भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी का महायुति गठबंधन महा विकास अघाड़ी से मुकाबला करेगा, जिसमें उद्धव ठाकरे की शिवसेना, शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस शामिल हैं। वोटों की गिनती 23 नवंबर को होगी।
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