नई दिल्ली: विगत 8 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने BS-IV वाहनों को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया था. इसके तहत अदालत ने कहा था कि 31 मार्च के बाद बिकी गाड़ियों का पंजीकरण नहीं होगा. शीर्ष अदालत ने अपने इस फैसले को अगले आदेश तक कायम रखा है. मतलब ये कि BS-IV वाहनों का पंजीकरण नहीं होगा. इसके साथ ही मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश अरुण मिश्रा ने मार्च में बेची गई गाड़ियों को लेकर नाराजगी जताई है.
उन्होंने बड़ी तादाद में गाड़ियों की बिक्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या धोखाधड़ी से कुछ हो सकता है. शीर्ष अदालत ने कहा कि मार्च के अंतिम सप्ताह में सामान्य से अधिक वाहन बिके, जबकि इस दौरान लॉकडाउन था. इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने मार्च में BS-IV वाहन बिक्री के आंकड़े भी मांगे हैं. शीर्ष अदालत ने BS-IV वाहनों की बिक्री और पंजीकरण के लिए 31 मार्च 2020 की डेडलाइन निर्धारित की थी. इसी के बीच में 22 मार्च को जनता कर्फ्यू था, जबकि 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन लागू कर दिया गया.
वहीं डीलरों के पास बड़ी तादाद में BS-IV टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर वाहन बिक्री के लिए बचे हुए थे. इसलिए डीलर BS-IV वाहनों की बिक्री और पंजीकरण की डेडलाइन बढ़ाने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत पहुंचे थे. इस पर शीर्ष अदालत ने डीलरों को 10 फीसदी BS-IV वाहनों को बेचने की अनुमति दी थी. इसके बाद आठ जुलाई को सर्वोच्च अदालत ने अपने 27 मार्च के आदेश को वापस ले लिया था. अदलात के इस फैसले के बाद 31 मार्च 2020 के बाद बिके BS-IV वाहनों के पंजीकरण पर रोक लग गई है. अब ताजा मामले में शीर्ष अदालत ने अपने इस फैसले को बरकरार रखा है.
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